SSC GK Questions Answers in Hindi (2020)

SSC से सम्बन्धित हिन्दी (Hindi) सामान्य ज्ञान (GK)

 हेलो दोस्तों......! एस.एस.सी.(SSC) से संबंधित सामान्य ज्ञान (GK) पर आधारित इस बहुमूल्य Post में आपका स्वागत है |students...जैसा कि आप सभी जानते हैं कि आजकल सभी प्रतियोगी परीक्षा में सामान्य ज्ञान  कितना जरूरी हो गया है इसी तरह एस.एस.सी. (SSC) परीक्षा में आपको सामान्य ज्ञान याद होना जरूरी है इसीलिए आज हम आपके लिए कुछ SSC GK in Hindi पर आधारित पोस्ट लेकर आए हैं जो आपको एस.एस.सी. तथा अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आपके सामान्य ज्ञान को बेहतर बनाने में आपकी सहायता करेगी | यदि आप एस.एस.सी. की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए यह प्रश्नोत्तर काफी बहुमूल्य एवं महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं |
तो चलिए इन बिषयों पर चर्चा शुरू करते हैं —
Students आप भी कम समय में अधिक ssc gk पढ़ना चाहते हैं तो आप निम्नलिखित topic पढ़ सकते हैं जो आपको आपके gk को तेजी से बढ़ाने में आपकी मदद करेंगे | ये कुछ महत्वपूर्ण बाते आपको जरूर पता होना चाहिए यदि आप ssc exam में पास होना चाहते हैं और सरकारी नौकरी पाने की चाह रखते हैं |

ग्रहों से सम्बन्धित जानकारी —
बुध ➡
1. यह सूर्य का सबसे नजदीकी ग्रह है, जो सूर्य निकलने के दो घंटा पहले दिखाई पड़ता है।
2. यह सबसे छोटा ग्रह है, जिसके पास कोई उपग्रह नहीं है।
3. इसका सबसे विशिष्ट गुण है—इसमें चुम्बकीय क्षेत्र का होना ।
4. यह सूर्य की परिक्रमा सबसे कम समय में पूरी करता है अर्थात् यह सौरमंडल का सर्वाधिक कक्षीय गति वाला ग्रह है।
5. यहाँ दिन अति गर्म व रातें बर्फीली होती हैं। इसका तापान्तर सभी ग्रहों में सबसे अधिक (600°C) है। इसका तापमान रात में -173°C व दिन में 427°C हो जाता है।

शुक्र ➡
1. यह पृथ्वी का निकटतम, सबसे चमकीला एवं सबसे गर्म ग्रह है।
2. इसे साँझ का तारा या भोर का तारा कहा जाता है, क्योंकि यह शाम में पश्चिम दिशा में तथा सुबह में पूरब की दिशा में आकाश में दिखाई पड़ता है।
3. यह अन्य ग्रहों के विपरीत दक्षिणावर्त (clockwise) चक्रण करता है।
4. इसे पृथ्वी का भगिनी ग्रह कहते हैं। यह घनत्व, आकार एवं व्यास में पृथ्वी के समान है।
5. इसके पास कोई उपग्रह नहीं है।

बृहस्पति ➡
1. यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। इसे अपनी धुरी पर चक्कर लगाने में 10 घंटा (सबसे कम) और सूर्य की परिक्रमा करने में 12 वर्ष लगते हैं।
2. इसके उपग्रह ग्यानीमीड सभी उपग्रहों में सबसे बड़ा है। इसका रंग पीला है।

मंगल ➡
1. इसे लाल ग्रह (Red Planet) कहा जाता है, इसका रंग लाल, आयरन ऑक्साइड के कारण है।
2. यहाँ पृथ्वी के समान दो ध्रुव हैं तथा इसका कक्षातली 25° के कोण पर झुका हुआ है, जिसके कारण यहाँ पृथ्वी के समान ऋतु परिवर्तन होता है।
3. इसके दिन का मान एवं अक्ष का झुकाव पृथ्वी के समान है।
4. यह अपनी धुरी पर 24 घंटे में एक बार पूरा चक्कर लगाता है।
5. इसके दो उपग्रह हैं—फोबोस और डीमोस
6. सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 687 दिन लगते हैं।
7. सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलिपस मेसी एवं सौरमंडल का सबसे ऊँचा पर्वत निक्स ओलम्पिया जो माउंट एवरेस्ट से तीन गुना अधिक ऊँचा है, इसी ग्रह पर स्थित है।

मार्स ओडेसी नामक कृत्रिम उपग्रह से मंगल पर वर्फ छत्रकों और हिमशीतित जल की उपस्थिति की सूचना मिली है। इसीलिए पृथ्वी के अलावा यह एकमात्र ग्रह है जिस पर जीवन की संभावना व्यक्त की जाती है। 6 अगस्त, 2012 ई. को NASA का मार्स क्यूरियोसिटी रोवर नामक अंतरिक्षयान मंगल ग्रह पर गेल क्रेटर नामक स्थान में पहुँचा। यह मंगल पर जीवन की संभावना तथा उसके वातावरण का अध्ययन कर रहा है।

शनि (Saturn) ➡
1. यह आकार में दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
2. इसकी विशेषता है—इसके तल के चारों ओर वलय का होना (मोटी प्रकाश वाली कुंडली)। वलय की संख्या 7 है । यह आकाश में पीले तारे के समान दिखाई पड़ता है।
3. शनि का सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन है जो सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है। यह आकार में बुध के बराबर है। टाइटन की खोज 1665 में डेनमार्क के खगोलशास्त्री क्रिश्चियन हाइजोन ने की। यह एकमात्र ऐसा उपग्रह है जिसका पृथ्वी जैसा स्वयं का सघन वायुमंडल है।
4. फोबे नामक शनि का उपग्रह इसकी कक्षा में घूमने की विपरीत दिशा में परिक्रमा करता है।
5. इसका घनत्व सभी ग्रहों एवं जल से भी कम है। यानी इसे जल में रखने पर तैरने लगेगा।

अरुण (Uranus) ➡
1. यह आकार में तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है। इसका तापमान लगभग-215°C है।
2. इसकी खोज 1781 ई. में विलियम हर्शल द्वारा की गयी है।3. इसके चारों ओर नौ वलयों में पाँच वलयों का नाम अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा एवं इप्सिलॉन है।
4. यह अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर (दक्षिणावर्त) घूमता है, जबकि अन्य ग्रह पश्चिम से पूर्व की ओर (वामावर्त) घूमते हैं।
5. यहाँ सूर्योदय पश्चिम की ओर एवं सूर्यास्त पूरब की ओर होता है।
6. इसके सभी उपग्रह भी पृथ्वी की विपरीत दिशा में परिभ्रमण करते हैं।
7. यह अपनी धुरी पर सूर्य की ओर इतना झुका हुआ है कि लेटा हुआ-सा दिखलाई पड़ता है, इसलिए इसे 'लेटा हुआ ग्रह' कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा उपग्रह टाइटेनिया (Titania) है।

वरूण (Neptune) ➡
1. इसकी खोज 1846 ई. में जर्मन खगोलज्ञ जहॉन गाले ने की है।
2. नई खगोलीय व्यवस्था में यह सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह है।
3. यह हरे रंग का ग्रह है। इसके चारों ओर अति शीतल मिथेन का बादल छाया हुआ है।
4. इसके उपग्रहों में ट्रिटॉन (Triton) प्रमुख है।

पृथ्वी (Earth) ➡
1. पृथ्वी आकार में पाँचवाँ सबसे बड़ा ग्रह है।
2. यह सौरमंडल का एकमात्र ग्रह है, जिसपर जीवन है। इसका एकमात्र उपग्रह चन्द्रमा है। इसका विषुवतीय व्यास 12,756 किमी. और ध्रुवीय व्यास 12,714 किमी. है।
3. यह अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व 1,610 किमी प्रतिघंटा की चाल से 23 घंटे 56 मिनट और 4 सेकेण्ड में एक पूरा चक्कर लगाती है। पृथ्वी की इस गति को घूर्णन या दैनिक गति कहते हैं। इस गति से दिन-रात होते हैं।
4. पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकेण्ड (लगभग 365 दिन 6 घंटे) का समय लगता है। इस समयावधि के दौरान परिक्रमा पूरी करने में पृथ्वी का माध्य वेग लगभग 30 किलोमीटर/सेकेण्ड (29.8 किलोमीटर/सेकेण्ड) होता है। सूर्य के चतुर्दिक पृथ्वी के इस परिक्रमा को पृथ्वी की वार्षिक गति अथवा परिक्रमण कहते हैं। पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा करने में लगे समय को सौर वर्ष कहा जाता है। प्रत्येक सौर वर्ष, कैलेण्डर वर्ष से लगभग 6 घंटा बढ़ जाता है, जिसे हर चौथे वर्ष में लीप वर्ष बनाकर समायोजित किया जाता है। लीप वर्ष 366 दिन का होता है, जिसके कारण फरवरी माह में 28 के स्थान पर 29 दिन होते हैं।
5. पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन, इसकी अक्ष पर झुके होने के कारण तथा सूर्य के सापेक्ष इसकी स्थिति में परिवर्तन यानी वार्षिक गति के कारण होती है। वार्षिक गति के कारण ही पृथ्वी पर दिन-रात छोटा-बड़ा होता है।
6. आकार एवं बनावट की दृष्टि से पृथ्वी शुक्र के समान है।
7. जल की उपस्थिति के कारण इसे नीला ग्रह भी कहा जाता है।
8. सूर्य के बाद पृथ्वी के सबसे निकट का तारा प्रॉक्सिमा सेन्चुरी है, जो अल्फा सेन्चुरी समूह का एक तारा है। यह पृथ्वी से 4.22 प्रकाशवर्ष दूर है।

बौने ग्रह :
यम (Pluto) ➡ IAU ने इसका नया नाम 1,34,340 रखा है। (क्लाड टामवो ने 1930 ई. में खोज की)
अगस्त 2006 ई. की IAU की प्राग सम्मेलन में ग्रह कहलाने के मापदंड पर खरे नहीं उतरने के कारण यम को ग्रह की श्रेणी से अलग कर बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया है ।
यम को ग्रह की श्रेणी से निकाले जाने का कारण है -
1. आकार में चन्द्रमा से छोटा होना
2. इसकी कक्षा का वृत्ताकार नहीं होना
3. वरुण की कक्षा को काटना

सेरस (Ceres) ➡ इसकी खोज इटली के खगोलशास्त्री पियाजी ने किया था। IAU की नई परिभाषा के अनुसार इसे बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया है। इसे संख्या 1 से जाना जायेगा।
इसका व्यास बुध के व्यास का 1/5 भाग है।
अन्य बौने ग्रह है चेरॉन एवं 2003 UB 313 (इरिस) ।


 लघु सौरमण्डलीय पिंड
क्षुद्र ग्रह (Asteroids) ➡ मंगल एवं बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के बीच कुछ छोटे-छोटे आकाशीय पिंड हैं, जो सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं, उसे क्षुद्र ग्रह कहते हैं। खगोलशास्त्रियों के अनुसार ग्रहों के विस्फोट के फलस्वरूप टूटे टुकड़ो से क्षुद्र ग्रह का निर्माण हुआ है।

क्षुद्र ग्रह जब पृथ्वी से टकराता है, तो पृथ्वी के पृष्ठ पर विशाल गर्त (लोनार झील-महाराष्ट्र) बनता है।
फोर वेस्टा एकमात्र क्षुद्र ग्रह है जिसे नंगी आँखों से देखा जा सकता है।


धूमकेतु (Comet) ➡
सौरमंडल के छोर पर बहुत ही छोटे-छोटे अरबों पिंड विद्यमान हैं, जो धूमकेतु या पुच्छल तारे कहलाते हैं। यह गैस एवं धूल
का संग्रह है, जो आकाश में लम्बी चमकदार पूँछ सहित प्रकाश के चमकीले गोले के रूप में दिखाई देते हैं।

धूमकेतु केवल तभी दिखाई पड़ता है जब वह सूर्य की ओर अग्रसर होता है, क्योंकि सूर्य किरणें इसकी गैस को चमकीला बना देती हैं। धूमकेतु की पूँछ हमेशा सूर्य से दूर होता दिखाई देता है।

हैले नामक धूमकेतु का परिक्रमण काल 76 वर्ष है, यह अंतिम बार 1986 ई. में दिखाई दिया था। अगली बार यह 1986 +76 = 2062 में दिखाई देगा।
धूमकेतु हमेशा के लिए टिकाऊ नहीं होते हैं, फिर भी प्रत्येक
धूमकेतु के लौटने का समय निश्चित होता है।


उल्का (Meteors) ➡
उल्काएँ प्रकाश की चमकीली धारी के रूप में देखते हैं जो आकाश में क्षणभर के लिए दमकती हैं और लुप्त हो जाती हैं। उल्काएँ क्षुद्र ग्रहों के टुकड़े तथा धूमकेतुओं द्वारा पीछे छोड़े गये धूल के कण होते हैं।

पृथ्वी और उसका सौर्यिक संबंध —
प्रकाश-चक्र (Circle of Illumination) ➡ वैसी काल्पनिक रेखा जो पृथ्वी के प्रकाशित और अप्रकाशित भाग को बाँटती है।
पृथ्वी की गतियाँ ➡ पृथ्वी की दो गतियाँ हैं —
1. घूर्णन (Rotation) या दैनिक गति ➡ पृथ्वी सदैव अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व घूमती रहती है जिसे पृथ्वी का घूर्णन या परिभ्रमण कहते हैं। इसके कारण दिन व रात होते हैं। अतः इस गति को दैनिक गति भी कहते हैं

2. परिक्रमण (Revolution) या वार्षिक गति ➡ पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमने के साथ-साथ सूर्य के चारों ओर एक दीर्घवृत्तीय मार्ग पर परिक्रमा करती है जिसे परिक्रमण या वार्षिक गति कहते हैं। पृथ्वी को सूर्य की परिक्रमा पूरा करने में 365 दिन 6 घण्टे का समय लगता है |

उसके परिक्रमण की गणना दिवसों के रूप में की जाती है तब सौर दिवस ज्ञात होता है। इसकी अवधि पूरे 24 घंटे होती है |
अपने परिक्रमा पथ में पृथ्वी सूर्य के चारों ओर 29.8 किमी./से. के वेग से चक्कर लगाती है।


उपसौर (Perihelion) ➡ पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा दीर्घवृत्तीय कक्षा में करती है जिसके एक कोकस पर सूर्य होता है।
जब पृथ्वी सूर्य के अत्यधिक पास होती है तो उसे उपसौर कहते हैं। ऐसी स्थिति 3 जनवरी को होती है। ऐसी स्थिति में पृथ्वी और सूर्य के बीच दूरी 14.70 करोड़ किमी है।

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अपसौर (Aphelion) ➡ पृथ्वी जब सूर्य से अधिकतम दूरी पर होती है तो उसे अपसौर कहते हैं। ऐसी स्थिति 4 जुलाई को होती है। ऐसी स्थिति में पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी 15.21 करोड़ किमी होती है।


एपसाइड रेखा ➡ उपसौरिक एवं अपसौरिक को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा सूर्य के केन्द्र से गुजरती है। इसे एपसाइड रेखा कहते हैं।


अक्षांश (Latitude) ➡ विषुवत वृत्त से उत्तर या दक्षिण दिशा में स्थित किसी स्थान की कोणीय दूरी को अक्षांश कहते हैं। यह कोण पृथ्वी के केन्द्र पर बनता है। इसे विषुवत वृत्त से दोनों ओर अंशों में मापा जाता है।

विषुवत वृत्त 0 अंश के अक्षांश को प्रदर्शित करता है। विषुवत वृत्त की उत्तरी एवं दक्षिणी दिशा में 1° के अंतराल से खींचे जाने पर 90-90 अक्षांश वृत्त होते हैं। यानी किसी भी स्थान का अक्षांश 90° से अधिक नहीं हो सकता।
विषुवत वृत्त के उत्तरी भाग को उत्तरी गोलार्द्ध और दक्षिणी भाग को दक्षिणी गोलार्द्ध कहते हैं।


अक्षांश समांतर (Parallels of Latitude) ➡ काल्पनिक रेखाओं का एक ऐसा समूह जो पृथ्वी के चारों ओर पूर्व से पश्चिम दिशा में विषुवत रेखा के समानान्तर खींचा जाता है, अक्षांश रेखा कहलाता है। अथवा भूमध्य रेखा से एकसमान कोणीय दूरी वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को अक्षांश रेखा कहते हैं।

भूमध्य रेखा 0° की अक्षांश रेखा है, अतः इस पर स्थित सभी स्थानों का अक्षांश 0° होगा। भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित अक्षांश रेखाओं को उत्तरी अक्षांश रेखाएँ तथा इसके दक्षिण में स्थित अक्षांश रेखाओं को दक्षिणी अक्षांश रेखाएँ कहते हैं। दो अक्षांश रेखाओं के मध्य की दूरी 111 किमी. होती है।


देशान्तर (Longitude) ➡ ग्रीनविच रेखा से किसी स्थान की कोणात्मक दूरी को उस स्थान का देशान्तर कहते हैं अथवा उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रूव को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा को देशान्तर रेखा कहते हैं।

देशांतर रेखाओं की लम्बाई बराबर होती है। ये रेखाएँ समानान्तर नहीं होती हैं। ये रेखाएँ उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव पर एक बिन्दु पर मिल जाती हैं। ध्रुवों से विषुवत रेखा की ओर बढ़ने पर देशान्तरों के बीच की दूरी बढ़ती जाती है तथा विषुवत रेखा पर इसके बीच की दूरी अधिकतम (111.32 किमी) होती है।

देशांतर रेखाओं को एक समान होने के कारण इसकी गणना में कठिनाई थी। इसीलिए सभी देशों ने सर्वसम्मति से यह निश्चित किया कि ग्रीनविच वेधशाला से गुजरने वाली देशांतर रेखा से गणना शुरू की जानी चाहिए। अतः इसे हम प्रधान मध्याह रेखा कहते हैं। इस देशांतर का मान 0° है। इससे हम 180° पूर्व तथा 180° पश्चिम देशांतर की गणना करते हैं।

प्रधान मध्याह्न रेखा की बायीं ओर की रेखाएँ पश्चिमी देशान्तर और दाहिनी ओर की रेखाएँ पूर्वी देशान्तर कहलाती हैं। ये क्रमशः पश्चिमी गोलार्द्ध एवं पूर्वी गोलार्द्ध कहलाते हैं। 180° पूर्व तथा 180° पश्चिम देशांतर एक ही रेखा है। गोलाकार होने के कारण पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूम जाती है, अतः 1° देशान्तर की दूरी तय करने में पृथ्वी को 4 मिनट का समय लगता है।

देशान्तर के आधार पर ही किसी स्थान का समय ज्ञात किया
जाता है। दो देशान्तर रेखाओं के बीच की दूरी गोरे (Gore) नाम से जानी जाती है। शून्य अंश अक्षांश एवं शून्य अंश देशान्तर अटलांटिक महासागर में काटती है।


संक्रांति (Solstice) ➡ सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन की सीमा को संक्रांति कहते हैं।


कर्क संक्रांति (Cancer Solstice) ➡ 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत् होता है, इसे कर्क संक्रांति कहते हैं। इस दिन उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन होता है।


मकर संक्रांति (Capricorn Solstice) ➡ 22 दिसम्बर को सूर्य मकर रेखा पर लम्बवत् होता है। इसे मकर संक्रांति कहते हैं। इस दिन दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन होता है।


विषुव (Equinox) ➡ यह पृथ्वी का वह स्थिति है, जब सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर लम्बवत् पड़ती हैं और सर्वत्र दिन एवं रात बराबर होते हैं।
23 सितम्बर एवं 21 मार्च को सम्पूर्ण पृथ्वी पर दिन एवं रात बराबर होते हैं। इसे क्रमशः शरद विषुव (Autumnal Equinox) एवं वसंत विषुव (Vernal Equinox) कहते हैं।

21 मार्च से 23 सितम्बर की अवधि में उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य का
प्रकाश 12 घंटे या अधिक समय तक प्राप्त करता है। अतः यहाँ दिन बड़े एवं रातें छोटी होती हैं। जैसे-जैसे उत्तरी ध्रुव की ओर बढ़ते जाते हैं, दिन की अवधि भी बढ़ती जाती है। उत्तरी ध्रुव पर तो दिन की अवधि छह महीने की होती है।

23 सितम्बर से 21 मार्च तक सूर्य का प्रकाश दक्षिणी गोलार्द्ध में 12 घंटे या अधिक समय तक प्राप्त होता है, जैसे-जैसे दक्षिणी ध्रुव की ओर बढ़ते हैं दिन की अवधि भी बढ़ती है। दक्षिणी ध्रुव पर इसी कारण छह महीने तक दिन रहता है। इस प्रकार उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव दोनों पर ही छह महीने तक दिन व छह महीने तक रात्रि रहती है।
पृथ्वी को अपनी अक्ष पर झुकी होने के कारण दिन व रात छोटा- बड़ा होता है।


सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) ➡ जब कभी दिन के समय सूर्य एवं पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा के आ जाने से सूर्य की चमकती सतह चन्द्रमा के कारण दिखाई नहीं पड़ने लगती है तो इस स्थिति को सूर्यग्रहण कहते हैं। जब सूर्य का एक भाग छिप जाता है, तो उसे आंशिक सूर्यग्रहण और जब पूरा सूर्य ही कुछ क्षणों के लिए छिप जाता है, तो उसे पूर्ण सूर्यग्रहण कहते हैं।


चन्द्रग्रहण (Lunar Eclipse) ➡ जब सूर्य और चन्द्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है, तो सूर्य की पूरी रोशनी चन्द्रमा पर नहीं पड़ती है, इसे चन्द्रग्रहण कहते हैं। चन्द्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा (Full-Moon) की रात्रि में ही होता है। प्रत्येक पूर्णिमा को चन्द्रग्रहण नहीं होता है, क्योंकि चन्द्रमा और पृथ्वी के कक्षा पथ में 5°का अन्तर होता है जिसके कारण चन्द्रमा कभी पृथ्वी के ऊपर से या नीचे से गुजर जाता है।

एक वर्ष में अधिकतम तीन बार पृथ्वी के उपच्छाया क्षेत्र से चन्द्रमा गुजरता है तभी चन्द्रग्रहण लगता है। सूर्यग्रहण के समान चन्द्रग्रहण भी आंशिक अथवा पूर्ण हो सकता है।


समय का निर्धारण ➡ एक देशान्तर का अन्तर होने पर समय में 4 मिनट का अन्तर होता है। चूँकि पृथ्वी पश्चिम से पूरब की ओर घूमती है। फलतः ग्रीनविच से पूरब की ओर बढ़ने पर प्रत्येक देशान्तर पर समय 4 मिनट बढ़ता जाता है तथा पश्चिम जाने पर प्रत्येक देशान्तर पर समय चार मिनट घटता जाता है |


अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा ➡ 180° देशान्तर को अन्तरराष्ट्रीय
तिथि रेखा कहा जाता है, क्योंकि इस रेखा के दोनों ओर
तिथियों में एक दिन का अंतर होता है। ग्रीनविच देशान्तर
तथा 180° देशांतर के बीच 24 घंटे का अन्तर होता है |

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इस ब्लॉग पर यह ssc gk in hindi पर आधारित आर्टिकल Himanshu rajput द्वारा लिखित है |
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